नई शिक्षा नीति 2020 – New Education Policy in Hindi

29 जुलाई बुधवार को मोदी सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति लाया गया है।
हमारे देश मे इससे पहले सिर्फ दो बार एजुकेशन पालिसी चेंज हुए है।
पहला है 1968 में और दूसरी बार है 1986 में। इन दोनों चेंज में कुछ ज्यादा परिवर्तन नहीं किया गया था।
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नई शिक्षा नीति 2020 – New Education Policy in Hindi
लेकिन, 34 साल के बाद इस New education policy में बहुत बड़ी चेंज किया गया है।
इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार स्कूल के 10+2 सिस्टम को खत्म किया जाएगा।
उसके जगह 5+3+3+4 सिस्टम को लागू होंगे। मल्टी-एंट्री और मल्टी-एग्जिट सिस्टम लाया जाएगा।
साइंस, आर्ट्स, कॉमर्स वाले स्ट्रीम खत्म हो जाएगा, रटने वाले शिक्षण के बदले प्रायौगिक शिक्षा के ऊपर जोर दिया जाएगा।
शिक्षा में देश के पूरे GDP का 6 प्रतिशत रुपिया लगाया जाएगा।
आइये, nayi siksha niti में क्या क्या बड़ी परिवर्तन हुए है उसे बारीकी से समझते है।

नई शिक्षा नीति 2020 – New Education Policy in Hindi:

इस नई एजुकेशन पॉलिसी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने दो समिति बनाये थे।
पहला है, Committee for Evolution of New Education Policy इसकी नेतृत्व दे रहे थे श्री T.S.R. Subramanian.
दूसरा है, Committee for Draft National Education Policy जिसकी नेतृत्व कर रहे थे Dr. K. Kashurirangan.
इन दोनों समिति के द्वारा 2 लाख से भी ज्यादा ग्राम पंचायत, 6600 block, 6000 ULB और 676 जिला के प्रस्ताव लिया गया है।
उसके बाद ही इस नई एजुकेशन सिस्टम को बनाया गया है।

नई एजुकेशन पॉलिसी में क्या चेंज हुए है:

इस शिक्षण नीति में जितने भी बड़ी बदलाव हुए है वे सारे नीचे बताया गया है।

1. स्कूल में 10+2 सिस्टम खत्म होगी

इस नई नियमों के तहत स्कूलों में 10+2 वाले सिस्टम खत्म कर दिया जाएगा।
उसकी जगह 5+3+3+4 सिस्टम सुरु होगा। यानी स्कूल के शिक्षण को चार स्तर में बंटा जाएगा।
इसमें पहेली 5 साल को प्री प्राइमरी लेवल कहा गया है। इस समय बच्चों की नीव तैयार किया जाएगा।
इन पांच साल के पहली 3 साल आंगनवाड़ी में शिक्षा लेना होगा इसके बाद कक्षा एक और कक्षा दो आएगा।
इस लेवल में 3 साल के बच्चे से लेकर 8 साल वाले बच्चों को कवर किया जाएगा।
प्री प्राइमरी के बाद आएगा प्रिपरेटरी लेवल। इसमें कक्षा 3 से लेकर कक्षा 5 तक होगी।
इन कक्षाओं में बच्चे को बिभिन्न विषय के बारे में परिचय कराया जाएगा।
इस स्तर में 8 साल के बच्चो से लेकर 11 साल के बच्चो को लाया जाएगा।
जैसे ही प्रिपरेटरी लेवल खत्म होगी उसके बाद आएगी मिडिल लेवल।
इसमें, कक्षा 6 से लेकर कक्षा 8 तक पढ़ाया जाएगा। इस स्तर में बच्चो को coding, व्यावसायिक और कौशल विकास के बारे में सिखाई जाएगी।
इस लेवल में, 11 साल से 14 साल तक के बच्चे कवर हो जाएगा।
और आखिरी लेवल को कहा जायेगा सेकंडरी लेवल। इसका अवधि होगी 4 साल की।
इन 4 साल में, कक्षा 9 से लेकर कक्षा 12 तक पढ़ाई जाएगी।
इसमें 14 साल से 18 साल के बच्चों को लाने की कोशिश किया जाएगा।
ध्यान देने वी बात यह है, पहली पांच साल में बच्चों को कोई भी एग्जाम देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कक्षा 3, 5, और कक्षा 8 में एग्जाम कंडक्ट किया लिया जाएगा।

2. साइंस, आर्ट्स, कॉमर्स वाले स्ट्रीम्स खत्म होगी

अभी के एजुकेशन सिस्टम में साइंस, आर्ट्स, और कॉमर्स वाले स्ट्रीम्स है।
लेकिन नई पॉलिसी में ऐसा नहीं होगा। इसमें बच्चों को अपने मन पसंद बिषय चुनने में आज़ादी दी जाएगी।
इस नई नियमों के तहत अगर कोई बच्चे चाहे तो इकोनॉमिक्स के साथ फिजिक्स, या मैथ के साथ हिस्ट्री भी ले सकते है।
मोटे तौर पर, कोई भी छात्रों अपने मन मुताबिक सब्जेक्ट  लेकर पढ़ाई कर सकते है।

3. कक्षा 6 से स्किल डेवलप किया जाएगा

छटी कक्षा से बच्चो की स्किल डेवलप करने के लिए कोडिंग, व्यावसायिक और कौशल विकास के बारे में सिखाया जाएगा।
इसमें, लोकल इंटर्नशीप की व्यवस्था भी उपलब्ध कराया जाएगा।

4. मातृभाषा के ऊपर जोर दी जाएगी

सरकार की मानना है कि आंचलिक भाषा मे बच्चे ज्यादा बेहतर से समझ सकते है।
इसलिए, इस एजुकेशन पॉलिसी में मातृभाषा के ऊपर जोर दिया गया है।
इसमें, पहली पांच साल यानी प्री प्राइमरी लेवल तक बच्चो को आंचलिक भाषा मे पढ़ाने की सुझाव दिया गया है।
उसके बाद अगर कोई चाहे तो अपनी मंत्री भाषा मे इस आगे जारी रख सकते है।
इस नियमों में बताया गया है कि किसी बच्चे को इंग्लिश थोप नही जाएगा।

5. बोर्ड एग्जाम आसान होगा

नई शिक्षा नीति के तहत 10 वी और 12 वी की बोर्ड एग्जाम को आसान बनाया जाएगा।
बार्षिक परीक्षा के बदले साल में दो बार एग्जाम कंडक्ट करना होगा।
बच्चों की रटने की प्रवृत्ति खत्म करने के लिए ज्ञानमूलक परीक्षण पर जोर दी जाएगी।

6. नई पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा

प्री प्राइमरी लेवल यानी आंगनवाड़ी के लिए नई पाठ्यक्रम बनाया जाएगा। 
इसके अलावा, अगर कोई बच्चा विदेशी भाषा सीखने में इंटरेस्ट हो तो उसके लिए नई पाठ्यक्रम बनाया जाएगा।

7. स्कूलों में परफॉर्मेंस का आकलन

नया एजुकेशन पॉलिसी आने के बार बच्चों की परफोर्मेंस की आकलन में बड़ी बदलाव होगी।
इस नियमों के तहत तीन चीज़ों के ऊपर मद्देनजर रखकर  रिपोर्ट कार्ड बनाया जाएगा।
तीन स्तर कुछ इस प्रकार के है, पहले बच्चा खुद करेगा, दूसरा उसके सहपाठियों के द्वारा और तीसरा शिक्षकों के द्वारा।
इसके अलावा भी, नेशनल असेसमेंट सेंटर बनाया जाएगा, जो समय समय पर बच्चों की परीक्षा लेगी।

8. कॉलेज में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम दे सकेंगे

नई शिक्षा नियमों के तहत, कॉलेज में भर्ती होने के लिए बच्चे कॉमन एंट्रेंस एग्जाम दे सकेंगे।
इस तरह के एग्जाम राष्ट्रीय एग्जाम ऐजेंसी कंडक्ट कराएगी।

9. ग्रेजुएशन की डिग्री 4 साल अवधि होगा

उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने इस नई शिक्षा नीति में बताया कि ग्रेजुएशन में मल्टी- एंट्री और मल्टी-एग्जिट वाले सिस्टम लागू होगी।
इससे बच्चो की भविष्य और भी उज्वल होगा। उन्होंने इसे एक उदाहरण देकर समझाया।
जैसे, अभी के शिक्षा व्यवस्था में अगर कोई बच्चे चार साल की इंजीनियरिंग या छह सेमेस्टर देने के बाद किसी कारण से आगे की पढ़ाई करने में सक्षम न रहे तो उनके लिए दूसरा रास्ता नहीं रहता।
इस समस्या को सुलझाने के लिए मुल्ट्री एंट्री और मुल्ट्री एग्जिट वाले सिस्टम सुरु किया जाएगा।
इस नीति के अनुसार, अगर कोई बच्चे को किसी कारणवश एक साल के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ना पड़े तो उसे एक साल की सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
वही दो साल बाद छोड़ने पर बच्चो को डिप्लोमा की सर्टिफिकेट देना होगा।
और तीन साल के बाद कोई छोड़े तो उन्हें अभी की तरह तीन साल के ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
लेकिन अगर कोई 4 साल की ग्रेजुएशन करना चाहे तो उन्हें आखिरी साल में रिसर्च समन्धित पढ़ाई जाएगी।
जो भी स्टूडेंट्स आगे रिसर्च लेकर पढ़ना चाहेगी उन्हें 4 साल की ग्रेजुएशन करना पड़ेगा।

10. 1 साल की MA करना होगा

जितने भी स्टूडेंट्स 4 साल की ग्रेजुएशन डिग्री करेंगे उन्हें 1 साल की MA करना पड़ेगा।
अगर कोई बच्चे तीन साल की ग्रेजुएशन किये है लेकिन MA करना चाहते है तो उन्हें 2 साल की MA करना पड़ेगा।

11. MPhil खत्म कर दिया जाएगा

जितनी भी सुडेंट्स रिसर्च करना चाहते उनके लिए अछि खबर, नई शिक्षा नीति के अनुसार उन्हें MPhil नहीं करना पड़ेगा।
MPhil पूरे तरीके से खत्म कर दिया जाएगा। इसलिए, रीसर्च करने वाले बच्चो को एक्स्ट्रा दो देने की जरूरत नहीं।
वे 4 साल की ग्रदूसशन, 1 साल की मास्टर डिग्री करने के बाद सीधे PhD कर सकेंगे।

12. UGC, NCTE, AICTE खत्म होंगी, एक रेगुलेटरी बोर्ड बनेगा

देश की नई शिक्षा नीति में UGC, NCTE, AICTE खत्म हो जाएगी।
इन सभी बोर्ड को खत्म करके एक रेगुलेटरी बोर्ड ‘Higher Education Commission of India’ बनाया जाएगा।
इस बोर्ड का चार तरह के काम होगा। जैसे रेगुलेशन, फंडिंग, अस्क्रेडिशन और सेटिंग स्टैण्डर्ड फ़ॉर लर्निग आउटकम।

13. रिसर्च के लिए फाउंडेशन बनाया जाएगा

नियति शिक्षा नीति में रिसर्च के ऊपर बहुत जोर दिया गया है।
इसके लिए, सरकार द्वारा नया नया नेशनल रिसर्च सेंटर बनाया जाएगा।
और बच्चो को नया इनोवेशन के लिए विभिन्न तरह से प्रोत्साहित किया जाएगा।
इस नीति के अनुसार, हर स्कूल, कॉलेज में वर्चुअल लैब बनाना होगा।

14. नेशनल स्कालरशिप पोर्टल खोल जाएगा

जितने भी SC, ST, OBC बच्चे आर्थिक संकट के कारण अपनी पढ़ाई पूरा नही कर पाते उनके लिए नेशनल स्कालरशिप पोर्टल कोली जाएगी।
इसके अलावा भी, हर यूनिवर्सिटी, स्कूल और कॉलेज को ऐसी स्टूडेंट्स को स्कालरशिप देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

15. राइट टू एजुकेशन की परिवर्तन

हमारे देश में पहले राइट टू एजुकेशन था 6 से लेकर 14 बर्स तक।
लेकिन इस नई एजुकेशन पॉलिसी में इसे बढ़ाकर 3 से 18 साल तक कराया गया है।
यानी, इस नियमों में, बच्चों को 3 से लेकर 18 साल तक एजुकेशन मुफ्त में मिलने वाले है।

16. स्कूल, कॉलेज के फीस पर नियंत्रण होगा

आज के समय प्राइवेट स्कूल और कॉलेज अपनी मां मुताबिक फीस डिमांड करते थे।
लेकिन नई शिक्षा नीति के अनुसार, सभी सरकारी और प्रिवेंट जितने भी इंस्टिट्यूट होगा उसके लिए फीस निर्धारित किया जाएगा।
इससे प्राइवेट इंस्टीटूट अपनी मन मुताबिक फीस नहीं ले पाएंगे।

17. विदेशी यूनिवर्सिटीज को कैंपस खोलने की अनुमति दी जाएगी

हमारे देश मे आज की समय किसी विदेशी यूनिवर्सिटी के कैंपस नहीं है।
लेकिन इस नई एजुकेशन नीति के अनुसार विदेशी यूनिवर्सिटीज को कैंपस खोलने की अनुमति दी जाएगी।
एक्सपर्ट्स का मानना यह है कि, इससे बच्चे को अछि यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए विदेशों में नहीं जाना पड़ेगा।
वे अपने देश मे रहकर विदेशी यूनिवर्सिटी में अछे से पढ़ सकेंगे।

18. बीएड 4 साल के होंगे

अभी, शिक्षक बनने के लिए 2 साल की बीएड करना पड़ता है।
लेकिन इस शिक्षा नियमों के तहत 2030 से बीएड के अवधि 4 साल के होगा।
शिक्षकों के नियोग पारदर्शिता के ऊपर आधारित होगी। समय समय पर विभिन्न माध्यम से शिक्षकों के कार्य क्षमताएं परख जाएगी।

19. मानव संसाधन विकास मंत्रालय का बदल दिया जाएगा

इस शिक्षा नीति के अनुसार, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नाम बाद दिया जाए।
इस नाम को बदलकर शिक्षा मंत्रालय रखा जाएगा। यह नाम काफी सरल और शिक्षा समन्धित है।

20. देश की 6 प्रतिशत जीडीपी शिक्षा में लगाया जाएगा

किसी भी देश को आगे बढ़ने के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका पालन करता है।
इसलिए इस नई शिक्षा नीति के अनुसार देश की चाह प्रतिशत जीडीपी शिक्षा में खर्च किया जाएगा।
[यह काम बहुत बर्ष पहले हो जाना चाहिए था लेकिन अभी हो रहा है]
इससे नई नई रीसर्च सेंटर, लैबोरेटरी, और इनोवेटिव काम मे लगाया जाएगा।

21. ऑनलाइन एजुकेशन के ऊपर जोर दिया गया है

इस कोरोना महामारी के चलते हमे ऑनलाइन एजुकेशन के महत्व कितना है यह पता चल गया है।
इसलिए, सरकार अभी से ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम बनाएगा।
इस फोरम में कोई स्टूडेंट अपनी समस्याओं को बता सकेंगे।
इस नीति के अनुसार स्कूल और कॉलेज में अपना ऑनलाइन एजुकेशन स्ट्रक्चर बनाना पड़ेगा।

22. साल 2021-2022 से इस शिक्षा नियम लागू होगा

साल 2021 से यानी अगले ही अकैडमिक साल से ही इस nayi siksha niti को लागू किया जाएगा।
अभी यह बिल सिर्फ कैबिनेट मंत्री द्वारा पास किया गया है लेकिन अभी इसका कानून बनने में बाकी है।
दोस्तो, इस आर्टिकल हमने देश की नई शिक्षा नीति के बारे आलोचना किये है।
इस नई एजुकेशन पॉलिसी में क्या सही है और क्या गलत यह आप कमेंट करके बात सकते है।
इस आर्टिकल को आप अपने सभी साथियों के साथ शेयर जरूर करे।
ताकि उन्हें भी देश के new education policy in hindi के बारे में पता लगे।
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